Crude Oil- 1 दिन में ही 5% सस्ता हुआ कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल के दाम भी हो सकते हैं कम

दोस्तो मध्य एशिया में चल रहे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह क्रूड ऑयल की कीमतें उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन दोनो देशों के बीच हुए हाल ही के समझौते के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट आई। सोमवार सुबह जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच क्रूड ऑयल की कीमत $82 प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी, लेकिन ट्रेडिंग सेशन के आखिर तक कीमतें काफी गिरकर $77 प्रति बैरल के आसपास आ गईं। इस गिरावट से भारतीय ग्राहकों को जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

क्रूड ऑयल की कीमतें क्यों गिरीं?

अचानक आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण US और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत का सकारात्मक नतीजा था। जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई में रुकावट का डर कम हो गया।

मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

24 घंटों के भीतर क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट आई।

US ने ईरानी ऑयल एक्सपोर्ट से जुड़े प्रतिबंधों में दो महीने की ढील दी।

ईरान द्वारा क्रूड ऑयल का एक्सपोर्ट जारी रखने से सप्लाई की कमी की चिंताएं कम हुईं।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने का डर कम हुआ है।

ऐसी उम्मीदें बढ़ रही हैं कि आने वाले दिनों में US और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक प्रगति जारी रह सकती है।

मौजूदा क्रूड ऑयल कीमतें

गल्फ क्रूड

सोमवार को $77.52 प्रति बैरल पर बंद हुआ।

इंट्राडे में $76 प्रति बैरल के निचले स्तर को छुआ।

मंगलवार सुबह $77.72 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

पिछले 24 घंटों में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई।

US क्रूड (WTI)

सोमवार को गिरकर लगभग $73 प्रति बैरल हो गया।

सेशन का अंत 4.53% की गिरावट के साथ हुआ।

मंगलवार को $74 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

पिछले 24 घंटों में लगभग 5.5% की गिरावट आई।

US ने ईरानी ऑयल की सीमित बिक्री की अनुमति दी

US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने एक जनरल लाइसेंस जारी किया है, जिसमें 21 अगस्त तक ईरान में बने क्रूड ऑयल, पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बिक्री की अनुमति दी गई है। इस कदम से ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम करने में मदद मिली है।

इस बीच, ईरान ने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड में हालिया बातचीत के दौरान उसने न तो अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने पर सहमति जताई और न ही कोई नई प्रतिबद्धता स्वीकार की, लेकिन बातचीत जारी रहने से ही मार्केट का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।

सप्लाई की स्थिति में सुधार

ईरान ने कुछ ऑयल एक्सपोर्ट फिर से शुरू कर दिए हैं जो पहले बाधित हो गए थे। सोमवार को लगभग 20 लाख (2 मिलियन) बैरल कच्चा तेल ले जा रहे दो ऑयल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रे।

UAE, कुवैत और इराक ने ग्राहकों को तेल की सप्लाई बढ़ा दी है।

इराक की योजना धीरे-धीरे उत्पादन को 42-43 लाख (4.2-4.3 मिलियन) बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने की है।

जानकारों का अनुमान है कि आने वाले हफ़्तों में बाज़ार में हर दिन 20-30 लाख (2-3 मिलियन) बैरल अतिरिक्त उत्पादन वापस आ सकता है।

इसका पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर क्या असर होगा?

 

भारत में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है, क्योंकि यहाँ ईंधन की कीमतें ग्लोबल ऑयल ट्रेंड्स से काफ़ी हद तक प्रभावित होती हैं। अगर कच्चा तेल हाल के उच्चतम स्तर से नीचे रहता है और सप्लाई की स्थिति में सुधार जारी रहता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम करने का मौका मिल सकता है।